lyrics
सुन गणेश के बापू, मेरे से भंग घोटू आवे ना,
तेरी रोज की घुटाई, मेरा हाथ रुक जावे ना!
कदे भांग, कदे धतूरा, कदे बेल का पत्ता,
इतना सारा बोझ मुझसे, अब उठावे ना...
सुन गणेश के बापू, मेरे से भंग घोटू आवे ना!"
(अंतरा 1)
(पार्वती:)
"सुबह-सुबह तुम धूनी रमाते, भस्म बदन पर लाते हो,
गणेश मांगे लड्डू, तुम बस भांग-भांग चिल्लाते हो!
घोट-घोट के बाजू दुख गए, दर्द सहा अब जावे ना,
सुन गणेश के बापू, मेरे से भंग घोटू आवे ना!"
(अंतरा 2)
(भोले बाबा )(मुस्कुराते हुए):
"गौरा रानी, तू क्यों रूठी, भांग मेरी तो बूटी है,
इसी के दम पे चलती देखो, दुनिया की ये खुटी है!
थोड़ा सा तू और घोट दे, रंग जमेगा भारी,
तेरे बिना ये भंगिया मेरी, लगती मुझको खारी!"
(अंतरा 3)
(पार्वती:)
"कार्तिकेय का मयूर शोर करे, नंदी करे लड़ाई,
ऊपर से ये भांग की आ गई, मेरी शामत आई!
जाओ किसी चेले को बुला लो, मुझसे घोंटी जावे ना,
सुन गणेश के बापू, मेरे से भंग घोटू आवे ना
(पार्वती:)
"पर क्या करूँ भोला मुखड़ा तेरा, देखा नहीं ये जाता है,
जितना मर्जी गुस्सा कर लूँ, प्यार तुम्हीं पे आता है!
लो घोट दी तुम्हारी भंगिया, अब तो मुस्काओ ना...
सुन गणेश के बापू, अब भंगिया पी के आओ ना!"