lyrics
आसमानों से उतरी तुम, या कोई दुआ हो
ख़ामोशी में भी बोलो तुम, जैसे कुछ सदा हो
बादलों में छुपी रौशनी, तेरे चेहरे की बात
कबूतर की परवाज़ में, है तेरी ही सौगात
तू ख़्वाब है या जागती आँखों का सफ़र
तू पास है या दिल में छुपा कोई असर
तेरे लम्स से हवा भी महके
फूलों के रंगों में तू ही चमके
चुप चुप से लम्हे, कुछ कह जाते हैं
तेरी आँखों में सारे मौसम बह जाते हैं
वक़्त भी थम जाए, जब तू मुस्काए
कभी दुआ बन जाए, कभी रूह छू जाए