lyrics
बिन तुम्हारे मैं नामुकम्मल हूँ
तेरी बातों से ख़ुशबू आए
तेरी यादों से दिल महके
तू जो मिल जाए, तो हर लम्हा
जैसे मौसम हो इक बादल हूँ
तू नज़र आए तो ख़्वाब जगे
तू न हो, तो ख़फ़ा सा दिन
तेरी हँसी से ज़िंदगी चमके
वर्ना लम्हों का बस जंगल हूँ
मेरे लफ़्ज़ों में तेरी आहट
मेरे गीतों में तेरा नाम
तू जो छू ले तो नग़मा बन जाऊँ
तू न हो, तो मैं बस ग़ज़ल हूँ
ये जो साँसें हैं तेरे दम से
तेरे होने की इक सूरत हैं
तू जो साथ है, तो मुकम्मल हूँ
वर्ना ख़ुद में भी बस इक ख़ल हूँ
अब मोहब्बत के रंग भरो मुझ में
एक तस्वीर हूँ, एक काजल हूँ
बिन तुम्हारे मैं नामुकम्मल हूँ
बिन तुम्हारे फ़क़त इक पल हूँ