lyrics
मेरे हिस्से का जीना तुम्हें दे रहा हूं/
अब बर्दाश्त नहीं होता जीना/
सोचा था जी लूंगा अपनी मर्जी से
लेकिन हो न सका/
आज भी संभाल कर रखा है
दिल का एक कोना/
तुम्हारे साथ जीने के लिए/
क्या कहूं कह नहीं पाता/
आंखों से बरसात बरसती रही /
चंद्रमा भी आग उगलने लगा/
शीतलता में भी ज्वाला दिखाई देने लगी /
कहीं पर भी रोशनी दिखाई नहीं दे रही/
क्या यही जीवन का मोड है/
परिवर्तन जीवन का लक्ष्य नहीं है/
यही सोचते सोचते आंखें भर आई/
फिर सुबह हुई सूरज निकला पंछी निकल पड़े/