दशों दिशा देख

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Musik skapad av Naresh Singhariya med Suno AI

दशों दिशा देख
v4

@Naresh Singhariya

दशों दिशा देख
v4

@Naresh Singhariya

Text
दशौ दिशा देख
मुझसा ना मीले एक
रावण सा है मेरा भेश
मेरे ही नाम का मचाहै बवाल
एसीपी हो या डीसीपी
ठोके है सब सलाम
जो ज्यादा दिखाएं बुद्धि
लाल हो जाती है गुद्धि
नीचे के पीछे भर देते मिर्ची
जो ज्यादा बोले
तो सीधी पड़ती मुंह पर लात
फिर भी ना होती बात
फिर भी जो करता है बात
टूट जाते हैं बतीस के बतीस दांत
हराम की ना खाई कभी भी कमाई
खिलाने के लिए जिंदा है मेरी माँई
किसी की गांड ना मेरी बोलकर भाई-भाई
जिंदगी ना जिनी मने ज्यादा हाई-फाई
बस बहुत है सुबह सांम के मिर्च रोटी
और दिन की तीन चार चाई
इससे ज्यादा कुछ भी ना मुझे चाहिए
दौगलौं से बच्चे
कोई भी यार ना होते सच्चे
बुरे वक्त में गांड दिखा देते हैं यार पक्के
Sirf कुत्ते ही होते हैं दिल के सच्चे
बिना खाए रोटी के भी
चौकीदारी करता है
पूरी ईमानदारी से
और जो कुत्ते को रोटी नहीदेता है
उसके लिए भी
कुत्ता अपनी जान दे देता है
कुत्ते तो यूं ही बदनाम है
भोकते तो पीठ पीछे इंसान है
खास मित्र और खास से रिश्तेदार
ही करते है पीठ पीछे से वार
दोगलो से बच्चों
दोगलो से रहो सावधान
दोगले लोग जान जान के के जान ले लेते हैं
प्यार को क्या समझेंगे वौ
जो वासना को ही प्यार कहते हैं
वासना को ही प्यार समझ कर बैठे हैं
जब भर जाए मन
तो किसी का भी नष्ट कर दो तन
मुझे खुद नहीं पता
कितनों के कीय है मैंने गाल लाल
अपने नाम का है बवाल
जाहा भी हुँ जाता वहां मचता भोकाल
क्योंकि साथ है मेरे महाकाल
जो ज्यादा बोल उसकी उधेड़ देते खाल
जिसको जो भी करना है कर लो
उखाड़ नहीं सकते मेरे छाठ का एक भी बाल
कभी दिल्ली तो कभी मनाली का फुकू में माल
शाम छेसे से बारा जमती है महफिल
फिर भी चढ़ती ना मुझे दारू
जो तुझे घुरे
उनके भूत में उतरू
जो चौड़े होते थे चौड़े में ऊनके
पिछवाड़ा लाल कर दिया एक कोने में
दिमाग जब सटकता
तो दारू हूं घटकता
हराम खाना खाता
अपनी मेहनत पर हूं जीता
अपनी मेहनत का हूं खाता
रातों को मैं जगाता
दिन में आराम से हूं सोता
मुझे मृत्यु की नहीं है चिंता
क्योंकि आत्मा को मिली है अमृता
मन में ना पलटा में कोई भी शंका
मैं किसी के बाप से भी नहीं डरता
चीते की तरह हूं जीता
जो ज्यादा बने रावण
तो जल्लादू में लंका
बजा के राम नाम का डंका
श्याम दाम दंड भेद के पिंजरे में है केद
किसी को भी मत बताओ अपने भेद
स्वतंत्र होकर भी रह गए सब केद
यह है राजतंत्र का षड्यंत्र
चंद पैसों के लिए मित्र ही मित्र को देता है मार
दोगलों को मौका ना दो बार बार
सही समय पर सीने से खंजर कर दो और पर
यहां जीत के भी हारना है
और हार के भी हारना है
तो फिर क्यों धर्म पर धर्म करना है
एक दिन तो सबको मरना है
तो जीते जी क्यों बार-बार मानना है
करने के बाद भी गगन आसमान
समुद्र को लेना है अपना नाम
ऐसा करना है काम
क्यों रोज मरते हो खामाखाम
सुबह शाम ले प्रभु का नाम
किसी को दर्द हो तो दर्द दो
और कहो लगा झंडू बाम
सब जाता है बिक
बस मिलना चाहिए दाम
बोलो जय श्री राम सुबह शाम बोलो जय श्री राम राम राम सभी भाइया ने
Musikstil
Generate a high-energy Hindi/Indian-pop gangster/club track inspired by modern “MAFIA” vibe — tempo ~100–110 BPM, key: minor (A minor या D minor feel) length 3:30–3:45.Intro 8–16 bars: dark synth pad

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