दशौ दिशा देख मुझसा ना मीले एक रावण सा है मेरा भेश मेरे ही नाम का मचाहै बवाल एसीपी हो या डीसीपी ठोके है सब सलाम जो ज्यादा दिखाएं बुद्धि लाल हो जाती है गुद्धि नीचे के पीछे भर देते मिर्ची जो ज्यादा बोले तो सीधी पड़ती मुंह पर लात फिर भी ना होती बात फिर भी जो करता है बात टूट जाते हैं बतीस के बतीस दांत हराम की ना खाई कभी भी कमाई खिलाने के लिए जिंदा है मेरी माँई किसी की गांड ना मेरी बोलकर भाई-भाई जिंदगी ना जिनी मने ज्यादा हाई-फाई बस बहुत है सुबह सांम के मिर्च रोटी और दिन की तीन चार चाई इससे ज्यादा कुछ भी ना मुझे चाहिए दौगलौं से बच्चे कोई भी यार ना होते सच्चे बुरे वक्त में गांड दिखा देते हैं यार पक्के Sirf कुत्ते ही होते हैं दिल के सच्चे बिना खाए रोटी के भी चौकीदारी करता है पूरी ईमानदारी से और जो कुत्ते को रोटी नहीदेता है उसके लिए भी कुत्ता अपनी जान दे देता है कुत्ते तो यूं ही बदनाम है भोकते तो पीठ पीछे इंसान है खास मित्र और खास से रिश्तेदार ही करते है पीठ पीछे से वार दोगलो से बच्चों दोगलो से रहो सावधान दोगले लोग जान जान के के जान ले लेते हैं प्यार को क्या समझेंगे वौ जो वासना को ही प्यार कहते हैं वासना को ही प्यार समझ कर बैठे हैं जब भर जाए मन तो किसी का भी नष्ट कर दो तन मुझे खुद नहीं पता कितनों के कीय है मैंने गाल लाल अपने नाम का है बवाल जाहा भी हुँ जाता वहां मचता भोकाल क्योंकि साथ है मेरे महाकाल जो ज्यादा बोल उसकी उधेड़ देते खाल जिसको जो भी करना है कर लो उखाड़ नहीं सकते मेरे छाठ का एक भी बाल कभी दिल्ली तो कभी मनाली का फुकू में माल शाम छेसे से बारा जमती है महफिल फिर भी चढ़ती ना मुझे दारू जो तुझे घुरे उनके भूत में उतरू जो चौड़े होते थे चौड़े में ऊनके पिछवाड़ा लाल कर दिया एक कोने में दिमाग जब सटकता तो दारू हूं घटकता हराम खाना खाता अपनी मेहनत पर हूं जीता अपनी मेहनत का हूं खाता रातों को मैं जगाता दिन में आराम से हूं सोता मुझे मृत्यु की नहीं है चिंता क्योंकि आत्मा को मिली है अमृता मन में ना पलटा में कोई भी शंका मैं किसी के बाप से भी नहीं डरता चीते की तरह हूं जीता जो ज्यादा बने रावण तो जल्लादू में लंका बजा के राम नाम का डंका श्याम दाम दंड भेद के पिंजरे में है केद किसी को भी मत बताओ अपने भेद स्वतंत्र होकर भी रह गए सब केद यह है राजतंत्र का षड्यंत्र चंद पैसों के लिए मित्र ही मित्र को देता है मार दोगलों को मौका ना दो बार बार सही समय पर सीने से खंजर कर दो और पर यहां जीत के भी हारना है और हार के भी हारना है तो फिर क्यों धर्म पर धर्म करना है एक दिन तो सबको मरना है तो जीते जी क्यों बार-बार मानना है करने के बाद भी गगन आसमान समुद्र को लेना है अपना नाम ऐसा करना है काम क्यों रोज मरते हो खामाखाम सुबह शाम ले प्रभु का नाम किसी को दर्द हो तो दर्द दो और कहो लगा झंडू बाम सब जाता है बिक बस मिलना चाहिए दाम बोलो जय श्री राम सुबह शाम बोलो जय श्री राम राम राम सभी भाइया ने
Стиль музыки
Generate a high-energy Hindi/Indian-pop gangster/club track inspired by modern “MAFIA” vibe — tempo ~100–110 BPM, key: minor (A minor या D minor feel) length 3:30–3:45.Intro 8–16 bars: dark synth pad