Letra da música
\[महिला आवाज़ – शुरुआत\]
तेरी यादों की बारिश में, मैं आज भी भीग जाती हूँ, जो बातें दिल में छुपाई थीं, वो खुद से कहकर रो जाती हूँ।
तेरी तस्वीर से पूछूँ अक्सर, क्या तुझे मेरी याद आती है? मैं जिस राह पे तन्हा चलती हूँ, क्या वो राह तुझे भी बुलाती है?
\[महिला आवाज़ – अंतरा 1\]
रातों को नींद नहीं आती, आँखों में तेरा चेहरा है, दिल के इस खाली आँगन में, बस दर्द का पहरा है।
तूने कहा था साथ रहेंगे, हर मौसम, हर हाल में, फिर क्यों छोड़ दिया मुझको, अधूरे से एक सवाल में?
मेरी हँसी भी खो गई है, मेरे ख़्वाब भी रूठ गए, तेरे जाने के बाद सनम, हम खुद से ही दूर हो गए।
मैं चाँद को देखूँ चुपके से, तेरी बातें याद करूँ, जो प्यार कभी तुझसे किया था, उस प्यार को कैसे बर्बाद करूँ?
तेरी गली से गुज़रती हूँ, कदम मेरे रुक जाते हैं, जिन मोड़ों पर हम मिलते थे, वो मोड़ मुझे समझाते हैं।
कि लौट के कोई आता नहीं, जो दिल से उतर जाता है, मगर मेरा दिल नादान सा है, हर आहट पर तेरा नाम बुलाता है।
\[महिला आवाज़ – मुखड़ा\]
लौट आना, लौट आना, मेरा दिल तुझे ही बुलाए, तेरे बिन ये ज़िंदगी मेरी, हर पल आँसू बहाए।
तू मेरा था, तू मेरा है, ये दिल समझ न पाए, तू किसी और का हो भी जाए, प्यार मेरा मर न पाए।
लौट आना, लौट आना, कभी मेरी याद सताए, मैं वहीं हूँ, जहाँ छोड़ा था, तेरा इंतज़ार बुलाए।
\[महिला आवाज़ – अंतरा 2\]
तेरे दिए हुए ख़त सारे, आज भी सँभाल रखे हैं, कुछ सूखे फूल किताबों में, तेरी ख़ुशबू के साथ रखे हैं।
जो वादे तूने किए थे, वो लफ़्ज़ अभी भी ज़िंदा हैं, मेरी पलकों के किनारों पर, कुछ आँसू अभी भी शर्मिंदा हैं।
मैं खुद को समझाती रहती, अब तेरा कोई हक़ नहीं, फिर दिल कहता है धीरे से, तुझसा मेरा कोई और नहीं।
क्या तुझे वो शाम याद है, जब बारिश में हम भीगे थे? एक छोटी सी दुनिया में, हम दोनों कितने खुश जीते थे।
तूने मेरा हाथ पकड़कर, जब जीने की कसम खाई थी, मैंने अपनी हर खुशी सनम, तेरे नाम लिखवाई थी।
अब वही कसमें ख़ामोश हैं, अब वही रातें वीरान हैं, तेरे बिना मेरी दुनिया में, बस यादें और तूफ़ान हैं।
\[पुरुष आवाज़ – शुरुआत\]
मैं भी रातों को जागता हूँ, तेरी यादों के सहारे, दुनिया के सामने हँसता हूँ, दिल में ग़म हैं बहुत सारे।
तू समझेगी कैसे जान मेरी, मैं कितना मजबूर रहा, तुझे भुलाने की कोशिश में, मैं खुद से ही दूर रहा।
\[पुरुष आवाज़ – अंतरा 1\]
तेरी आँखों में जो सपने थे, उन सपनों का मुजरिम हूँ, तुझे खुशी देने निकला था, आज अपने ग़म में गुम हूँ।
मैंने सोचा वक़्त बदलेगा, हम फिर एक हो जाएँगे, जो फ़ासले दरमियाँ आए, एक दिन मिट जाएँगे।
पर वक़्त ने ऐसी चाल चली, हम दोनों बिछड़ते गए, जो लफ़्ज़ लबों तक आ न सके, वो दिल में ही जलते गए।
तेरी तस्वीर को देखता हूँ, और नज़रें झुका लेता हूँ, जब कोई तेरा नाम ले, मैं बात बदल सा देता हूँ।
मेरी जेबों में खाली ख़त हैं, मेरे दिल में तेरा जहाँ, मैं आज भी उस मोड़ पे ठहरा, जहाँ छूटा था तेरा हाथ।
काश मैं तुझे रोक लेता, काश मैं सच कह पाता, जो दर्द छुपा था सीने में, तेरे सामने रख पाता।
न तू बुरी थी, न मैं बुरा था, बस वक़्त हमारा हार गया, एक छोटी सी ग़लतफ़हमी से, प्यार हमारा बिखर गया।
\[पुरुष आवाज़ – मुखड़ा\]
लौट आना, लौट आना, मेरा दिल तुझे ही पुकारे, तेरे बिन ये साँसें मेरी, लगती हैं बोझ सी सारी।
तू मेरी थी, तू मेरी है, दिल अब भी यही दोहराए, चाहे दुनिया बदल भी जाए, प्यार तेरा न मिट पाए।
लौट आना, लौट आना, मुझको फिर से अपना बनाना, जो कहानी अधूरी छोड़ी, उसको मिलकर