Letra da música
गम बहुत है जिंदगी में,
जरा देख कर तो देखो।
दुःख की एक चुटकी से ढह मत जाना,
क्योंकि दुःख का पहाड़ पचा गया तो पीडा?
मैं हर किसी को बचा रहा हूं,
ज्यादातर यहीं पर मैं गलत हो जाता हूं
क्योंकि मैं हर किसी को बदलता रहता हूं।
सोचूंगा तो उनके मन में
बसने की कोशिश करूंगा
क्योंकि उनमें से ज्यादातर लोग
यहीं घमंडा में रहते हैं...!
भगवान ने पेट दिया
और पेट ने भूख दी
और उसी भूख ने दुख
पर विजय पाना सिखाया,
क्योंकि भूख पैसे को नहीं खा सकती
और क्योंकि पैसे भूख से
ज्यादा खाना नहीं खा सकते?
अर्थात् जीवन में धन,
शक्ति और सौन्दर्य का स्थान
कुछ निश्चित सीमा तक ही है।
लेकिन ये बात तो सच है
कि भगवान की मूर्ति खरीदते समय
वे रुपयों की कीमत लगाते हैं
और बस इतना ही
मूर्ति घर में लाओ
और भगवान से करोड़ों रुपए मांगो
. सचमुच मन में अँधेरा है
और दीपक मंदिर में जलाया जाता है,
हर कोई मुझे समझ नहीं पाता,
क्योंकि मैं एक ऐसी किताब हूँ
जिसमें शब्द कम और सब्र ज्यादा है।
कोई भी सहमत नहीं होगा,
लेकिन ये कड़वा सच है.
लेकिन यह भी कहा जाता है
कि सोने का मूल्यांकन करने के लिए
एक सुनार की आवश्यकता होती है,
लेकिन आप एक कबाड़ी से इसकी
उम्मीद कभी नहीं कर सकते....!
यूँ ही दिन नहीं बदलते,
मेहनत और अपमान
एक साथ सहना पड़ता है
क्योंकि दुःख का पहाड़ भी पचाना पड़ता है...!
आपका प्रिय कुणाल गौतमी-सुनील गायकवाड