가사
**रामायण की महिमा**
**प्रस्तावना:**
रामायण की कथा अमर है,
भारत की यह धरोहर है।
धर्म और कर्म की यह गाथा,
हमें सिखाती सच्ची राह।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम,
जिनके हैं आदर्श महान।
वनवास से लेकर लंका विजय तक,
हर पल में उनका सत्य विवेक।
**राम का जन्म:**
अयोध्या नगरी थी सुहानी,
हर ओर थी खुशहाली,
दशरथ राजा का राज था,
हर कोई करता था बड़ाई।
संतान सुख की आस लिए,
रानी कौशल्या थीं चुप।
आशीर्वाद ऋषियों का पाया,
श्रीराम का जन्म हुआ तब।
धन्य हुई अयोध्या नगरी,
धरती पर अवतरित राम,
श्रीराम का वह प्यारा बालपन,
हर कोई देखता अचंभ।
राजकुमार की शान निराली,
धर्म और नीति की बात बताई।
मर्यादा का पाठ सिखाया,
सबने श्रीराम को सराहा।
**राम-लक्ष्मण और विश्वामित्र:**
विश्वामित्र मुनि आए द्वार,
राजा दशरथ से बोले बार।
अहिल्या उद्धार का समय आया,
धर्म का पालन ही धर्म बताया।
श्रीराम संग लक्ष्मण को लिया,
वेदों का ज्ञान, शस्त्रों का दिया।
राम-लक्ष्मण ने तब दिखलाया,
श्रीराम ने ताड़का का संहार किया।
राक्षसों के संकट से मुनि को मुक्ति दी,
श्रीराम ने हर संकट को हर लिया।
जनकपुर की धरती पर,
माता सीता से प्रथम मिलन हुआ।
धनुष तोड़ा शिवजी का,
सीता को वरदान मिला।
**सीता-राम विवाह:**
जनकपुर नगरी में उत्सव छाया,
सीता-राम का मिलन हो आया।
विवाह हुआ धूमधाम से,
अयोध्या में खुशियों की बयार आई।
राम संग सीता का नाता,
धरती पर आदर्श सिखलाता।
हर नारी में सीता की छवि,
हर पुरुष में राम की शक्ति।
**कैकयी का वरदान:**
दशरथ ने वचन निभाया,
कैकयी को वरदान दिलवाया।
चौदह वर्ष का वनवास मिला,
राजपाट भरत को दिया।
राम ने बिना कोई विलंब किया,
वनवास को धर्म समझ लिया।
लक्ष्मण और सीता साथ चलीं,
धर्म पथ की राह पकड़ लीं।
अयोध्या में सबने विलाप किया,
राम के बिना जीवन कठिन हुआ।
भरत ने राम से मिलने की आस लगाई,
चरण पादुका लेकर राज संभाली।
राम ने कहा, "धर्म ही धर्म है,
जो हुआ है, वही सत्य है।"
**वनवास की यात्रा:**
राम, लक्ष्मण, और सीता चले,
दंडक वन में कष्ट सहे।
ऋषि-मुनियों से आशीर्वाद लिया,
धर्म का पालन करते गए।
शबरी के जूठे बेर खाए,
प्रेम का पाठ सिखलाया।
हर संकट को झेलते गए,
सच्चाई का दीप जलाते गए।
पंचवटी में उन्होंने ठिकाना बनाया,
रावण के दूतों ने संकट फैलाया।
सीता हरण की योजना बनी,
रावण ने छल से सीता को हर लिया।
जनकनंदिनी रोती रहीं,
राम ने उनका संदेश सुना।
**हनुमान की भक्ति:**
हनुमान जी की भक्ति महान,
रामभक्त ने किया काम महान।
लक्ष्मण को शक्ति से उबारा,
संज्ञीवनी लाकर संकट टाला।
सीता माता का संदेशा लाए,
लंका की खबर श्रीराम को बताए।
जलाकर लंका को हनुमान ने,
राम का परचम लहराया।