가사
[Intro]
(धीमी बांसुरी की तान और हारमोनियम का आलाप)
(आ... ओ... आ...)
"लोग कहते हैं इश्क़ में सब राख हो जाता है,
पर हमने तो राख में भी अपनी मोहब्बत को ज़िंदा रखा है..."
[Verse 1]
हम ना बाज़ आएंगे मोहब्बत से
हम ना बाज़ आएंगे मोहब्बत से
जान जाएगी और क्या होगा
हाँ... जान जाएगी और क्या होगा
जाने इस दिल का हाल क्या होगा
जान जाएगी और क्या होगा
[Chorus]
हम ना बाज़ आएंगे...
मोहब्बत से हम ना बाज़ आएंगे...
जान जाएगी और क्या होगा!
[Music Break]
(तेज़ तबला और सरोद की जुगलबंदी)
[Verse 2 - New]
ज़ख्म खा कर भी हम मुस्कुराएंगे
तेरी गलियों में फिर से हम आएंगे
तूने ठुकराया है हमें तो क्या...
हम तो अपनी वफ़ा ही आज़माएंगे
बेवफाई का भी सिला क्या होगा
जान जाएगी और क्या होगा
[Verse 3]
आईने दिल में उतरती है तस्वीर तुम्हारी
धड़कनें कहती हैं, है जागीर तुम्हारी
तेरा वादा अगर वफ़ा होगा
तेरा वादा अगर वफ़ा होगा
जाने इस दिल का हाल क्या होगा
जान जाएगी और क्या होगा
[Bridge - Emotional Build-up]
(संगीत थोड़ा गहरा और भारी होता है)
वो जो कसमों के धागे थे, टूट गए...
वो जो मंज़िल के साथी थे, छूट गए...
मगर इस टूटे दिल में भी उम्मीद बाकी है,
तेरी एक नज़र ही मेरे जीने को काफी है!
[Verse 4 - New]
लोग दुनिया में प्यार करते हैं
हम तो सजदा ए यार करते हैं
तू मिले या ना मिले ये मुकद्दर है
हम तो बस तेरा इंतज़ार करते हैं
इंतज़ार का अंजाम क्या होगा
जान जाएगी और क्या होगा
[Verse 5]
हश्र में मेरा हश्र क्या होगा
हश्र में मेरा हश्र क्या होगा
तेरी जानिब अगर खुदा होगा
तेरी जानिब अगर खुदा होगा
जाने इस दिल का हाल क्या होगा
जान जाएगी और क्या होगा
[Outro - Slow Fade]
हम ना बाज़ आएंगे...
इश्क़ से... वफ़ा से... मोहब्बत से...
जान जाएगी... और क्या होगा...
(बांसुरी की धीमी आवाज़ के साथ गाना समाप्त होता है)
음악 스타일
Powerful traditional Sufi Qawwali, deep emotional male vocal inspired by classic Pakistani qawwali style, strong and high-energy singing with soulful improvisation, harmonium lead melody, tabla and dh