เนื้อเพลง
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तेरा नाम जलता पाया है,
हर अक्षर में इक दर्द छुपा,
जिसे दिल ने पढ़कर गाया है।
शमा की लौ भी काँप उठी,
जब तेरा ज़िक्र हुआ उन ख़तों में,
तेरे लफ़्ज़ों ने मेरी रूह को,
जैसे फिर से जीना सिखाया है।
तेरे बिना ये रात अधूरी,
तेरे बिना हर साँस वीरान,
तेरे प्यार की ख़ुशबू अब भी,
इन सूखे काग़ज़ों में महकती जान।
कितनी बार लिखा और फाड़ा,
कितनी बार तुझसे कुछ कहना चाहा,
पर ख़ामोशी ने हर बार मुझको,
तेरे ख्वाबों में खो जाने दिया।
तेरी यादों के इस वीराने में,
मैं अब भी साँसें भरती हूँ,
और उन जले हुए ख़तों में,
हर रोज़ तुझसे मिलती हूँ…