[Verse 1] नुवा रासा रे नुवा जीवा रे दुलौड़ खेतों में अम सावन से भीगे रे
बिरासत का बोझ कंधों पर हल्का रे भीड़ में दौड़ते घर की तरफ लौटे रे
[Chorus] नुवा रासा रे नुवा जीवा रे दुलौड़ सागेन ऐसा रे हम साँसों से बाँधें रस्सा रे
नुवा रासा रे नुवा जीवा रे अम साँवते सागेन ऐसा रे दिल धरती से बोले वैसा रे (ओ हो)
[Verse 2] सिंचाई की राहें पाँवों में मिट्टी रे अम गाँव की गली में हँसी हमारी सत्ती रे
बेर की छाँव तले थाली में दाल भात रे मेले में तुम संग थामा हुआ था हाथ रे
[Chorus] नुवा रासा रे नुवा जीवा रे दुलौड़ सागेन ऐसा रे हम साँसों से बाँधें रस्सा रे
नुवा रासा रे नुवा जीवा रे अम साँवते सागेन ऐसा रे दिल धरती से बोले वैसा रे (अरे हाँ)
Musikstil
Earthy folk groove with organic percussion and warm harmonium; male vocals up front, call-and-response backing. Verses feel intimate and rooted, chorus opens into a communal singalong with claps and group shouts, building energy then dropping back to a gentle sway at the end.