[Verse 1] सुबह की अज़ान से पहले मेरी जाग सूरज से रेस खेत मेरा राग कंधे पे हल आँखों में आग रग रग में दौड़ता बीजों का भाग
पैरों में कीचड़ माथे पे पसीना फटा पुराना कुर्ता दिल में ज़मीन का नगीना बाबा के हाथों की रेखाओं में ये खेत पीढ़ियों का वादा हर फसल में लेख
[Chorus] हुक मिट्टी से जुड़ा पसीने में सोना किसान बोले सच झूठ का क्या होना हल की धार खेतों में रोशनी मिट्टी का राजा यही है पहचान मेरी
[Verse 2] बादल से सौदा नज़रें आसमान दुआओं में भीगता सूखा सामान सरकारी कागज़ पे थरथराती कलम जेब में धुआँ दिल में जलता आलम
फिर भी मैं बोऊँ उम्मीद की कतार हर क्यारी में रखूँ बच्चों का संसार जो भी रहे चाहे कम चाहे ज़्यादा रोटी में बाँटूँ यही मेरा इरादा
[Chorus]
Musikstil
Rustic Indian folk-rap blend: earthy dholak and tight hip-hop drums, plucked ektara and subtle harmonium drones. Male vocals with a gritty, close-mic verse delivery that opens into a proud, chantable hook with gang vocals. Energy builds from an intimate first verse into a stomping, call-and-response chorus the whole village could shout along to.