दिन वही, रातें वही, पर मैं वो न रहा तन्हा इन शामों में कोई भी अपना न था चाँद और तारे भी बोले कि ये क्या हुआ हाँ, मैं वही, तुम वही, पर समा वो न रहा मोरे पिया तू न समझा मैं इस दुनिया का न था
खोया दिल, खोई रातों में ढूँढूँ मैं क्या औरों से शिकवा, पर अपनों ने भी क्या किया नहीं इस दुनिया में जो अपना लगा ज़माने की धूप ने ही मुझको रुसवा किया मोरे पिया तू न समझा मैं इस दुनिया का न था
रिश्ते सभी बन जाते हैं टूटने के लिए एक लम्हा मोरे... मोरे पिया कैसे... कैसे जिया
रिश्ते सभी बन जाते हैं टूटने के लिए एक लम्हा मोरे... मोरे पिया कैसे... कैसे जिया
मोरे पिया मोरे... मोरे पिया कैसे... कैसे जिया
Musikstil
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