वक़्त की परछाई

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Musik skapad av Rahul Kumar rana med Suno AI

वक़्त की परछाई
v4

@Rahul Kumar rana

वक़्त की परछाई
v4

@Rahul Kumar rana

Text
[Verse]
वक़्त ने छीना हर वो पल
जो कभी मेरे साथ थे
जल
हाथों की लकीरों में खो गए
वो नाम जो मेरे अपने थे

[Prechorus]
अब चुप हैं दुआओं के सिलसिले
खामोश हैं रातों के काफ़िले

[Chorus]
अब तो ख्वाब भी डरते हैं
उस चेहरे को देखने से
सन्नाटा गूंजता है
हर गली हर कोने में

[Verse 2]
आँखों में हैं अधूरे ख्वाब
दिल के ज़ख्मों के जवाब
पलकों पे हैं टूटे सपने
खो गए वो अपने अपने

[Bridge]
वो साये जो कभी साथ चले
आज परछाई बनकर मिले
सवाल हैं मगर जवाब नहीं
इन लम्हों में कोई हिसाब नहीं

[Chorus]
अब तो ख्वाब भी डरते हैं
उस चेहरे को देखने से
सन्नाटा गूंजता है
हर गली हर कोने में
Musikstil
melancholic, slow, acoustic; soft instrumental layers with a blend of sitar and piano to evoke deep emotions

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