मुकुटबन्ध

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Musik skapad av sanghprakash Dudde med Suno AI

मुकुटबन्ध
v3.5

@sanghprakash Dudde

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Text
सातवीं सदी में ह्वेनसांग ने कुशीनगर की यात्रा की। यात्रा के सिलसिले में वे मकुटबंधन चैत्य पहुँचे। मकुटबंधन चैत्य बुद्ध का अंतिम संस्कार स्थल है।
मकुटबंधन चैत्य पूर्व में मल्लों का मकुटबंधन संथागार हुआ करता था। यहीं मल्ल राजाओं का मकुट बंधन होता था। मल्लों ने यहीं बुद्ध के अंतिम संस्कार किए और यह चैत्य बनवाए।
खुदाई से पहले मकुटबंधन चैत्य के ऊपर भवानी की मठिया स्थापित थी। पूरा क्षेत्र वनाच्छादित और दुर्गम था। स्थानीय लोग चैत्य की ईंटे उखाड़ कर ले जाया करते थे।
ह्वेनसांग नदी के पार 300 कदम चलकर इस स्तूप के पास पहुँचे थे। वह नदी हिरण्यवती थी। वह आज भी इस स्तूप से कोई 300 कदम पर बहती है।
पूर्व मध्य काल में कुशीनगर और देवरिया पर भरों का शासन था। इनके एक प्रमुख राजा इंदु भर हुए। दूसरे राजा राम भर भी हुए।
राम भर ने स्तूप के निकट राम भर झील बनवाई थी। ह्वेनसांग के समय में यह झील नहीं थी। स्तूप जब टीला में तब्दील हो गया, तब भी राम भर झील बची रही। फिर स्तूप टीले को भी राम भर टीला कहा जाने लगा।
1910 में राम भर टीले की खुदाई हीरानंद शास्त्री ने कराई। हीरानंद शास्त्री अज्ञेय के पिता थे। लेकिन पूरे स्तूप का अनावरण 1956 में हुआ।
मल्लों का दिया गया मकुटबंधन चैत्य नाम विस्मृत होते गया और इसे राम भर स्तूप के नाम से जाना जाने लगा।
राम भर ही बाद में रामाभार हो गया जैसे बृज भर का बृजाभार हो गया है। वहाँ के बोर्ड पर यही रामाभार स्तूप अंकित है।
Musikstil
thai

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