राख बन गया मैं…

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Música criada por Vaijnath Phad com Suno AI

राख बन गया मैं…
v4

@Vaijnath Phad

राख बन गया मैं…
v4

@Vaijnath Phad

Letra da música
(Verse 1)
प्यारी थी तू, जैसे ठंडी छांव,
पर चली गई तू बनके आँधी…
एक ख्वाहिश थी, एक कली जैसी,
खिलने से पहले ही तू तोड़ गई बांधी।

अब यादें बन गईं ज़हर सी,
दिल में उठता है दर्द का शोर…
मेरी आँखों में देख ज़रा तू,
जलता है अब बस अंगार ही और।



(Chorus)
राख बन गया मैं, तेरे नाम से जला,
हर साँस में बस तू, अब भी है चला…
पैसे की चमक में तू खो गई कहीं,
और मैं तेरा साया बनकर मिट गया यहीं…



(Verse 2)
हाथों में हाथ लिए जब चलते थे,
दुनिया थी अपनी ख्वाबों की जैसे…
तेरी हँसी पे बरसता था चाँद,
तेरी खामोशी से अंधेरा बसते।

पर वो जो जादू था, अब कहाँ गया?
दिल का रिश्ता यूँ क्यों टूट गया?
हर धड़कन में तू है अब भी,
पर मैं तन्हा इस राह पे रह गया।



(Bridge)
वो आया सोने के तोहफे लेकर,
और तू हो गई उसकी दीवानी…
तेरे लिए इश्क़ सस्ता पड़ गया,
मेरे लिए वो ज़िंदगी की कहानी।

मेरे जज़्बातों की कोई कीमत नहीं,
तेरे पैसों ने सब रिवायत छीनी…
आज तू है उस चमक में मुस्कुराती,
और मैं हर रात राख में सुलगती।



(Chorus)
राख बन गया मैं, तेरे नाम से जला,
हर साँस में बस तू, अब भी है चला…
किस्मत ने लिखा था जो इश्क़ मेरा,
वो तूने मिटाया, और मैं जल गया सारा…



(Outro)
लोग हँसेंगे मेरे हाल पर,
पर एक दिन तुझे भी समझ आएगा ये प्यार…
जब तेरी आँखों से गिरेगा वो आँसू,
तब खत्म होगी मेरी आख़िरी पुकार…

राख बन गया मैं…
पर तेरे इश्क़ में अब भी जलता रहूँगा।
Estilo de música
Contemporary Classical, slow sad, Male Voice, 60-80 BPM

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