[Verse 1] नुवा रासा रे नुवा जीवा रे दौड़ती ऋतुएँ संग हम साँवले कहानियों में रे
बीजों में दौड़ती धुन अँगनाई में हमारी आहट गीली मिट्टी की गोद में खुलती आँखें नई राहत
[Chorus] हम साँवते आगे रे हम साँवते आगे रे (ओ रे) थकी हथेली में उजाला धूल भरे पैरों में सवेरे रे
हम साँवते आगे रे टूटी गलियों से भी रुई-से सपनों को बुनते दिल की चरखी घूमें रे
[Verse 2] सिंचाई की पहली बूँद आँगन में खिलती हँसी काँटों पर चलती राहें फिर भी गुनगुनाएँ “चलो अभी”
निंदिया रूठी तो क्या तारों से की बात नई थके बदन पर ठंडी हवा जैसे माँ की थाप वही
[Chorus] हम साँवते आगे रे हम साँवते आगे रे (अरे रे) माथे की लकीरों पर लिख लें अपना सवेरे रे
हम साँवते आगे रे कड़वे दिनों के भीतर गरम चूल्हे-सी उम्मीद धीमे-धीमे धधके रे
[Bridge] भीड़ में छोटा नाम सही पर मन में बड़ा इरादा टूटे सपनों के टुकड़ों से बन जाए नया प्याला
[Chorus] हम साँवते आगे रे हम साँवते आगे रे (ओ रे) पथरीले साँसों के ऊपर बरसें नरम नज़ारे रे
हम साँवते आगे रे थोड़ी हँसी थोड़ा ज़िद हर गिरकर उठने में फिर से जन्म हमारे रे
Stijl van muziek
Earthy folk groove with jangly acoustic guitars, rustic percussion, and male vocals. Verse stays intimate with a single guitar and soft drone; chorus blossoms with group claps, call-and-response backing, and a warm bass undercurrent. Subtle flute lines weave between phrases, and the bridge drops dynamics for a near-a cappella moment before a final, jubilant hook.