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सतनाम सतनाम, बोलव जी सतनाम ।
घासीदास बाबा के, गावत हाँ हम गुणगान ॥
सतनाम सतनाम… ॥
गांव-गांव में गूँजे, सत के स्वर संसार,
जन्मे जंगेपुर धरती, किया उजियार-प्यार ।
जंगल में तप साधे, पाय गा ज्ञान दान,
भेदभाव मिटाए बाबा, दे गा मानवता पहचान ॥
सतनाम सतनाम… ॥
सादा जीवन बोले, सत्य राह दिखाए,
ऊँच-नीच के बात ला, बाबा दूर भगाए।
मनखे-मनखे बर कहिन, रहव भइया समान,
सतगुरु घासीदास जी के, गऊँ मैं जय-जय गान ॥
सतनाम सतनाम… ॥
सत के जोत जलाही, मन के भीतर आस,
भक्ति रंग में भींजव, देहु मोला विश्वास।
झूम-झूम गावा सबो, बाजे ढोलक-तान,
सतनामी परबत चढ़थे, सतनाम के जयगान ॥
सतनाम सतनाम, बोलव जी सतनाम …
घासीदास बाबा के, गावत हाँ हम गुणगान ॥