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Music Created By hina malik With Suno AI

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v4

@hina malik

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Lyrics
चाँद बन संवर के जब चाँदनी लुटाता है
चौदहवीं की रातों में याद क्यों तुम आते हो

हवाएँ गुनगुनाती हैं तुम्हारा ही फ़साना
फ़िज़ा हर एक गोशे में बस तुम्हें दोहराती है

सितारे झुक के जैसे कुछ तुम्हारे राज़ कहते हैं
फ़िज़ाएँ चुप रहें लेकिन निगाहें बात करती हैं

दरख़्तों की घनी छाँव में तुम्हारा लम्स जागे
कभी महके हुए फूलों में तुम्हारा अक्स भागे

ये रातें, ये सुकूत, और ये ख़ामोशियों का प्यार
ये सब कुछ देख कर दिल को तुम्हारी हो गई है हार

तुम्हें पुकारती है चाँदनी इन हल्की साँसों में
तुम्हें पुकारती है रूह भी बेनाम प्यासों में

चौदहवीं की रातों में क्यों दिल तड़प सा जाता है
शायद चाँद भी मुझ सा है, तुम बिन उदास रह जाता है
Style of Music
Surprise, Female VoiceEMD

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