Do rugo ka setu

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Musique créée par Sarah Kumari avec Suno AI

Do rugo ka setu
v4

@Sarah Kumari

Do rugo ka setu
v4

@Sarah Kumari

Paroles
कहानी: दो युगों का सेतु
शाम का वक्त था। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी।
वीर अपने भाई के दो महीने के नन्हे बेटे को गोद में लिए फ्लैट से नीचे उतरा था। बच्चे को खुली हवा में घुमाने का मन था। पास के मैदान में बहुत से बच्चे खेल रहे थे—किसी के हाथ में बल्ला, किसी के पैर में गेंद।
मैदान से थोड़ी दूरी पर एक पुरानी-सी गुफा थी। अचानक बच्चों की गेंद उछलती हुई उस गुफा के अंदर चली गई।
“अरे, हमारी गेंद!” बच्चे चिल्लाने लगे।
वीर मुस्कुराया, “अरे चिंता मत करो, मैं अभी लेकर आता हूँ।”
तभी पास खड़ा एक आदमी बोला,
“रुको भाई, तुम नए लगते हो इस शहर में। तुम्हें पता नहीं, उस गुफा में जाना खतरे से खाली नहीं।”
वीर हँस पड़ा,
“अरे अंकल, आप लोग भी ना… भूत-चुड़ैल, डायन-वान में मैं नहीं मानता। मैं बस गेंद लेने जा रहा हूँ।”
आदमी ने सिर हिलाया, “जैसी तुम्हारी मर्जी।”
बच्चे चिल्लाने लगे,
“चाचू जल्दी लाओ गेंद!”
वीर बच्चे को गोद में सँभालता हुआ गुफा के अंदर चला गया।
गुफा ठंडी और अँधेरी थी। जैसे ही उसने गेंद उठाई, उसकी नजर सामने एक बड़े पत्थर पर पड़ी। उस पर सुनहरे अक्षरों में कुछ लिखा था। अक्षर चमक रहे थे।
वीर ने पढ़ने की कोशिश की…
और तभी अचानक ज़मीन हिलने लगी। सामने हवा में एक चमकता हुआ दरवाज़ा-सा खुल गया—एक रहस्यमय पोर्टल!
“ये क्या है?” वीर बोल भी नहीं पाया था कि तेज़ रोशनी फैली और—
पल भर में वीर और उसकी गोद में सोया नन्हा बच्चा उस पोर्टल के भीतर समा गए।
2500 साल पहले की दुनिया
जब वीर को होश आया, तो उसने खुद को एक अजनबी जंगल में पाया। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पेड़, अजीब सी खुशबू, और दूर पहाड़ों पर बना एक भव्य महल।
“ये जगह… ये तो हमारे ज़माने की लगती ही नहीं,” वह बुदबुदाया।
Style de musique
Audio

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