[Verse 1] जिस दिन जाऊँगा अपने घर माया साथ न जाएगी ये दुनिया बस कठपुतली है डोर यहीं रह जाएगी
रंग-तमाशा हँसी-आँसू सब कुछ यहीं छूटेगा मुरशिद की रहमत लेकर ही रूह सफ़र में उठेगा
[Chorus] कठपुतली की ये डोर यहीं मैं तो बस मुसाफ़िर हूँ जो कुछ तेरा रख ले तू खाली दिल का ज़ाफ़िर हूँ इस दुनिया की सारी चाहत मिट्टी में मिल जाएगी मैं नाम तेरे का सहारा लेकर ही चल दूँगा जी
[Verse 2] थोड़े सपने थोड़ी ख़्वाहिश थोड़ी सी नादानी थी थोड़ी शोहरत थोड़ी शोख़ी थोड़ी सी वीरानी थी
अब जब हिसाब खुला तो जाना कुछ भी अपना था ही नहीं बस तेरी रहमत साथ चले बाकी का रिश्ता मिट्टी से ही
[Chorus]
Estilo de música
Soft acoustic folk with harmonium and subtle flute, mid-tempo. Male vocals up close and intimate, almost spoken in the verses; choruses bloom with warm backing harmonies and a gentle bass swell. Minimal percussion with brushed snare and hand hits, leaving space for reflective pauses and a delicate instrumental break before the final refrain.