Bhajan

574

Música creada por DEEPAK SAINI con Suno AI

Bhajan
v4

@DEEPAK SAINI

Bhajan
v4

@DEEPAK SAINI

Letra
बाल समय रबि भक्षी लियो तब,
तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सो त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ १॥
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिय कौन बिचार बिचारो॥
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ २॥
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो॥
हेरि थके तट सिन्धु सबै तब,
लाए सिया-सुधि प्रान उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ ३॥
रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मारो॥
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ ४॥
बाण लग्यो उर लछिमन के तब,
प्रान तजे सूत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो॥
आनि सजीवन हाथ दिए तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ ५॥
रावण युद्ध अजान किया तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो॥
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ ६॥
बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मंत्र विचारो॥
जाए सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ ७॥
काज किए बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहीं जात है टारो॥
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥ ८॥
Estilo de música
Pop, Male Voice

Te podría gustar

Lista de reproducción relacionada