[Verse 1] जब भी लिया है नाम तेरा दिल को सुकून आया टूटी हुई साँसों को भी जीने का हुनर आया
या रसूल अल्लाह तू रहमतों का साया तेरी मोहब्बत ने ही मुझे इंसान बन पाया
[Chorus] या रसूल अल्लाह दिल की सदा सुन ले तेरी गली का आशिक अपने गुनाह चुन ले आँखों में तेरी रोशनी सीने में तेरी परछाई तेरी मोहब्बत ने ही मेरी ज़िंदगी सजाई (या रसूल)
[Verse 2] रातों की तन्हाई में जब दिल बहुत रोता है होंठों पे बस नाम तेरा आँसू को भी धोता है
मैला सा दिल था मेरा तेरी नज़र ने चमकाया टूटी हुई आदतों को राह की तरफ बुलाया
[Chorus] या रसूल अल्लाह दिल की सदा सुन ले तेरी गली का आशिक अपने गुनाह चुन ले आँखों में तेरी रोशनी सीने में तेरी परछाई तेरी मोहब्बत ने ही मेरी ज़िंदगी सजाई (या नबी)
[Bridge] जब भी मैं गिर जाता हूँ तेरी हयात याद आती सहन-ओ-सबर के किस्सों से ज़ंजीरें सब खुल जाती
एक ही सहारा तू है रूह की हर तड़प में तेरा चरित पढ़ता जाऊँ राह मिले हर क़दम पे
[Chorus] या रसूल अल्लाह दिल की दवा तू ही तेरे क़दमों की धूल मेरी सना तू ही आँखों में तेरी रोशनी सीने में तेरी परछाई तेरी मोहब्बत ने ही मुझे इंसान बन पाया (या रसूल अल्लाह)
Musikstyle
Urdu-Hindi devotional ballad with rich strings, soft rubab, and airy tabla; intimate male vocals up close in the verse, then a swelling, cinematic chorus with layered harmonies and subtle choir pad, ending in a gentle, unresolved fade on the final hook