[Intro] दतिया का नाम है गर्म लब पे दुआ नहीं सिर्फ़ ज़हर आँख पे काला चश्मा दिल में सर्द आज भीड़ नहीं डर रहेगा सड़कों पे
[Chorus] हम दतिया जिला के बादशाह दिन में घूमे खुला रात हमारा राज गलत काम देखा तो गोली मारेंगे सुबह तक हो जाएगा साफ़ रास्ता साफ़ हम दतिया जिला के बादशाह आँख मिला फिर सोचना भी मत गलत काम देखा तो गोली मारेंगे सुबह तक हो जाएगा साफ़ रास्ता साफ़
[Verse 1] गली के मोड़ पे बैठे चार यार चेहरों पे कट पीछे पुरानी दुश्मनी आगे नया झगड़ा सेट जेब में हाथ नहीं कमरे में ग़ुस्सा भरा जिसका नाम लिया उसका खेल यहीं ख़त्म करा गाँव से लेकर शहर तक फैला है डर मुँह से कम आँखों से करते बात इधर रोज़ मरते नहीं एक दिन में हिसाब चुकता कदम हमारे भारी ज़मीन बोले रुक जा
[Chorus]
[Verse 2] सुबह की नमाज़ से पहले बजते हैं फ़ोन "भाई फिर गड़बड़" उधर काँप रहा ट्रोन नंबर लगा पता लगा गाड़ी हुई चालू काँधे पे बैठा ग़ुस्सा बोला "चल आज मालू" सिगरेट की राख से ज़्यादा जली हैं हड्डियाँ सच से ज़्यादा झूठ बोलतीं कई ज़ुबानियाँ जो भी मुड़ेगा तोडेगा मिट्टी में मिला देंगे कानून से पहले अपना फ़ैसला सुना देंगे
[Bridge] [धीमी भारी आवाज़] नाम मत ले दिल धड़क जाएगा सामने आ रंग बदल जाएगा कौन है यहाँ जो डरता नहीं जो सच में फौलाद वो दतिया में ही पनपे कहीं
[Chorus]
Musikstyle
Dark Hindi drill-rap, heavy subs and tight hi-hats. Hook is chanted gang-style with layered male vocals, verses sit in a snarling low-mid register. Sparse eerie synths and short brass stabs accent punchlines. Beat drops harder on the hook with crowd shouts and ad-libs; bridge strips to bass and percussion before a final explosive chorus.