) फिर से आ जाना, ये दिल तुम से वफ़ा मांगता है एक और मुलाक़ात का वादा मांगता है
(अंतरा १) कुछ अधूरी है कहानी, कुछ अधूरे हैं سخ़न ये निगाहें तरसती हैं तेरी सूरत के लिए चंद लम्हों का सहारा भी बहुत है लेकिन ये दुआ है कि मिले तो सदियों की तरह
(कोरस) याद रह जाए न बस ख़्वाब की सूरत कोई पल चाहता हूँ कि हक़ीक़त बने ये रिश्ता अज़ल फिर से कह दो ये अरमान निभाने आओगे मेरे ख़्वाबों को हक़ीक़त बनाने आओगे
(अंतरा २) क्यों नज़र दे के छुपा लेते हो पलक़ों के पीछे क्यों नया साज़ बजाते हो उदासी के बीच में मैं तो डूबा हुआ हूँ चाहत के समुंदर में यहाँ और तुम साहिल पे सदा दे के बुलाते हो वहाँ
(इख़्तिताम / समापन) फिर मिलोगे कभी, ये यक़ीन दिलाओ ज़रा मेरे दिल की धड़कनों को सुकून दिलाओ ज़रा एक और मुलाक़ात का वादा मांगता है ये दिल तुम से वफ़ा का वादा मांगता है