[Verse 1] मैंने सपने गिने थे रातों में खामोशी के हर साए तले पर हर ख्वाब से पहले आ खड़ी कुछ दीवारें कुछ फ़ैसले
कभी अपनों की उम्मीदें भारी कभी हालात का बोझ मिला मैं चाह कर भी रुक-रुक सा गया जब रास्ता काँटों से था भरा
[Chorus] ये दीवारें ये फ़ैसले किस तरफ़ खींचें मुझे मैं खुद से ही पूछूँ हर पल किसको मानूँ किसे टाल दूँ मैं
ये दिल बोले चल पड़ अभी पर डर बाँधे पाँव सभी जो भी क़दम बढ़ता हूँ मैं अधूरा सा रह जाता हूँ मैं (ओ-ओ)
[Verse 2] खिड़की पर धूप उतर के पूछे कब तक यूँ ही ठहरा रहूँ हाथों में लकीरें थक कर कहें अब अपनी कहानी खुद ही लिखूँ
पर आँखों में बचपन की तस्वीरें पीछे से आवाज़ें दें "मत भूलना तुम किसके हो" कहकर फिर आगे के रस्ते धुंधले रहें
[Chorus] ये दीवारें ये फ़ैसले किस तरफ़ खींचें मुझे मैं खुद से ही पूछूँ हर पल किसको मानूँ किसे टाल दूँ मैं
ये दिल बोले चल पड़ अभी पर डर बाँधे पाँव सभी जो भी क़दम बढ़ता हूँ मैं अधूरा सा रह जाता हूँ मैं
[Bridge] शायद कल का सूरज पूछेगा किसके लिए तुम जीते थे डर के साए या अपने ख्वाबों किसके आगे झुकते थे (हाँ)
[Chorus] इन दीवारों इन फ़ैसलों से आगे बढ़ना है मुझे आज खुद से वादा करता हूँ अब मैं ही राहें चुन लूँगा मैं
ये दिल बोले चल पड़ अभी इस बार सुन लूँ बात सभी जो भी क़दम बढ़ाऊँगा मैं खुद तक पहुँच ही जाऊँगा मैं (ओ-ओ)
النمط من الموسيقى
Warm indie ballad with male vocals, brushed drums, and gently strummed acoustic guitar; verses stay intimate and close-mic’d with soft piano doubling key phrases, chorus blooms with airy pads and stacked harmonies, subtle bass and tom swells push emotional peaks, bridge strips back to almost solo vocal before a final, lifted hook.